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भारत में सरोगेसी कानून

 

सेरोगेसी, जिसे आमतौर पर ‘किराये की कोख’ के नाम से जाना जाता है, की मानव प्रजनन प्रणाली के वस्तुकरण, व्यवसायीकरण तथा शोषण किये जाने के लिए आलोचना की गयी है। जहाँ कुछ लोग सेरोगेसी को अप्राकृतिक मानते हैं, वहीँ कई निःसंतान दंपति इसे अभिभावाकता के सुख का अनुभव करने के अवसर के रूप में मानतें हैं। भारत में, हालांकि सेरोगेसी के रास्ते के बाद से अपनी कम लागत तथा अनुकूल क़ानूनी परिवेश के कारण सबसे अधिक मांग में होने के बावज़ूद, इसमें सम्मलित पक्षों के विशेष नियमों तथा दायित्वों का आभाव है। इसी कारण, नीति निर्माताओं, सेरोगेट माओं, भावी अभिभावकों, क़ानूनी सलाहकारों, इत्यादि सहित, सभी हितधारकों के मध्य, कई अस्पष्टता रहती है।

यह पाठ्यक्रम सेरोगेसी की अवधारनाओं, विशेष तौर पर व्यावसायिक सेरोगेसी पर स्पष्टता प्रदान करता है। यह व्यावसायिक सेरोगेसी में शामिल क़ानूनी मामलों की व्याख्या करता है, सहायता प्राप्त प्रजनन प्रौद्योगिकी विधेयक 2013; इंडियन काउन्सिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च दिशानिर्देश, 2005; तथा व्यावसायिक सेरोगेसी पर सरकारी नीतियों सहित, प्रासंगिक कानूनों पर चर्चा करता है। यह पाठ्यक्रम सेरोगेट माओं, तथा भावी अभिभावकों के लिए मददगार होगा क्योंकि इसमें मामलों का अध्ययन, विभिन्न सेरोगेसी समझौतों/करारों की व्याख्या शामिल है तथा यह प्रक्रिया तथा कानून पर स्पष्टता के लिए एफएक्यूएस प्रदान करता है।

पाठ्यक्रम परिणाम

 
 

इस पाठ्यक्रम के समाप्त होने पर, आप सक्षम होंगें:

  • सेरोगेसी की अवधारणा को समझना
  • सेरोगेसी पर मौजूदा क़ानूनी सरंचना कार्य का विश्लेषण
  • सेरोगेसी में शामिल क़ानूनी मामलों के बारे में परिवारों को सलाह देना

पाठ्यक्रम की रुपरेखा

 
 
  • मोड्यूल 1 – परिचय
  • मोड्यूल 2 – व्यावसायिक सेरोगेसी में क़ानूनी मुद्दे
  • मोड्यूल 3 – निष्कर्ष
  • प्रमाणपत्र परीक्षा/ मूल्यांकन

CERTIFICATION

 

Honors Badge

यह कोर्स किसे करना चाहिए?

  • वकीलों
  • क़ानूनी सलाहकारों तथा अधिवक्ताओं
  • शोध छात्रों
  • सेरोगेट माओं
  • आम लोगों को जो सेरोगेसी कानूनों में रूचि रखतें हों

स्तर: शुरुआत

भाषा: हिंदी

अवधि: 6 महीने

आंकलन विधि

पाठ्यक्रम का प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए, पाठ्यक्रम के अंत में शिक्षार्थी का सभी असाइनमेंट्स का जमा करवाना तथा प्रमाण पत्र परीक्षा में कम से कम 50% अंक अर्जित करना अनिवार्य है।

लेखक के बारे में

हरलीन कौर एक वकील है जो 2013 से दिल्ली तथा चंडीगढ़ में लैंगिक अधिकारों के क्षेत्र में कार्य कर रहीं हैं। वह सक्रिय रूप से उस दल के साथ शामिल है जो यौन उत्पीडन की रोकथाम तथा कार्यस्थल विविधता पर राष्ट्रीय विश्वविध्यालय के न्यायिक विज्ञान के ऑनलाइन डिप्लोमा पाठ्यक्रम की अवधारणा बनाते तथा तैयार करतें हैं। संस्थाओं के आईसीसी के लिए एक बाहरी सदस्य तथा एक शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए, उन्होंने लैंगिक तथा श्रम अधिकारों के क्षेत्र में कार्य करने वाले कई पेशेवरों के साक्षात्कार लिए हैं।

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