भारत में वैकल्पिक विवाद का समाधान तंत्र

 
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जब न्यायलय तथा क़ानूनी व्यवस्थता भारतीय क़ानूनी प्रणाली के मान्यता प्राप्त स्तंभ हैं, वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) धीरे-धीरे वाणिज्यिक तथा निजी विवादों को हल करने का एक पसंदीदा तरीका बनता जा रहा है। चाहे वह बहु मिलियन डॉलर सीमा-पार निर्माण उद्योग विवाद हो अथवा पति-पत्नी के मध्य एक पूर्ण घरेलु विवाद, एडीआर तकनीकियाँ पारंपरिक मुकदमों पर कई लाभ के साथ, व्यापक विविधताओं के संदर्भों में लागू होता है। हांलांकि, ज़्यादातर वकील, सलाहकार तथा पेशेवेर उचित रूप से विवाद के समाधान को प्राप्त करने के लिए संघर्ष करतें हैं, तथा इसलिए उनमें आवश्यक कौशल की कमीं होती है।

यह पाठ्यक्रम भारत में प्रचलित विविध एडीआर अभ्यास की रूपरेखा तथा विभिन्न परिस्थितियों- दोनों घरेलु तथा अंतर्राष्ट्रीय में उसकी उपयोगिता को प्रस्तुत करता है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य प्रत्येक वैकल्पिक विवाद समाधान तकनीक की व्यवहारिक प्रयोज्यता पर चर्चा करने का तथा घरेलु तथा अंतर्राष्ट्रीय दोनों प्रकार के विभिन्न लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुशल वार्ताकार, बिचौलियों तथा मध्यस्थों का निर्माण करना है।

पाठ्यक्रम का उद्देश्य

 
 

इस पाठ्यक्रम के समाप्त होने पर, शिक्षार्थी निम्न के संबंध में ज्ञान तथा कौशल से परिचित होंगें:

  • एडीआर तंत्र तथा पारंपरिक मुकदमों कके साथ इसकी तुलना
  • अभ्यास में विभिन्न एडीआर तकनीकी तथा उनके मध्य का अंतर
  • विभिन्न एडीआर तकनीकियों के लिए व्यवहारिक प्रक्रियायें
  • विभिन्न एडीआर तकनीकियों के संदर्भ में घरेलु तथा अंतर्राष्ट्रीय फैलाव के मध्य अंतराफलक

पाठ्यक्रम की रूपरेखा

 
 
  • मोड्यूल 1 – मध्यस्थता, बीच-बचाव तथा समझौता का परिचय
  • मोड्यूल 2 – मध्यस्थता के कानूनों का अवलोकन
  • मोड्यूल 3 – मध्यस्थता तथा समझौता अधिनियम, 1996 के तहत मध्यस्थता की प्रक्रिया
  • मोड्यूल 4 – अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता
  • मोड्यूल 5 – मध्यस्थता, समझौता तथा एडीआर के अन्य प्रारूप
  • मोड्यूल 6 – एडीआर विधियों का सेक्टर तरीकों से व्यावहारिक अनुप्रयोग
  • मोड्यूल 7 – निष्कर्ष
  • प्रमाणपत्र परीक्षा / मूल्यांकन

किसको यह पाठ्यक्रम लेना चाहिए?

  • क़ानूनी सलाहकार तथा परामर्शदाता
  • वकीलों
  • कानून के छात्रों तथा शोधकर्ताओं
  • वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र में रूचि रखने वाले अन्य हितधारक

स्तर: शुरुआत

भाषा : हिन्दी

मूल्यांकन विधि

पाठ्यक्रम का प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए, पाठ्यक्रम के अंत में शिक्षार्थी का सभी असाइनमेंट्स का जमा करवाना तथा प्रमाण पत्र परीक्षा में कम से कम 50% अंक अर्जित करना अनिवार्य है।

लेखक के बारे में

सुश्री गीतांजलि शर्मा एक योग्य वकील, प्रमाणित मध्यस्थ तथा वर्तमान में कर्नाटका सरकार के साथ एक सलाहकार हैं। उन्होंने लक्ष्मी कुमारन तथा श्रीधरन अटॉर्नी (वकीलों) के दल में एक वरिष्ठ सहयोगी के रूप में कार्य किया है, जहाँ वह क्षेत्रों के व्यापक सीमा जिसमें तेल तथा गैस, टैक्सी संघों, ऑटोमोबाइल कंपनी, कन्वेयर बेल्ट तथा पेंट उद्योग शामिल हैं, के घरेलु तथा अंतर्राष्ट्रीय मुवक्किलों के लिए विवादपूर्ण तथा परामर्श दोनों प्रकार के कार्यों में शामिल थीं। उन्होंने नकुल दीवान के दिल्ली मंडल, बैरिस्टर (20 एसेक्स स्ट्रीट लंदन) में एक सहायक के रूप में भी कार्य किया है।

सुश्री शर्मा ने कैंब्रिज विश्वविध्यालय से कानून में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। वह शिकागो विश्वविध्यालय के हर्रिस पब्लिक पालिसी स्कूल में सदस्य है। उन्हें प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय कानून की हेग अकादमी में निजी अंतर्राष्ट्रीय कानून समारोह में भाग लेने के लिए छात्रवृति से सम्मानित किया गया तथा उन्हें 2015 में अमेरिकी बार एसोसिएशन एशिया प्रशांत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए एक प्रतिनिधि के रूप में चुना गया था।

इससे पहले, उन्होंने संस्थाओं के लिए सीखाये जाने के लिए मोड्यूल तथा टूल किट तैयार कियें हैं जिसमें अमेरिकी बार एसोसिएशन (एबीए), माध्यमिक शिक्षा केन्द्रीय बोर्ड (सीबीएसई) तथा विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) शामिल हैं।
 

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