सिविल पलडिंग्स

 
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प्रतिपादन एक सिविल विवाद में न्ययालय तथा पक्षों को सभी तथ्यों के साथ अवगत कराने के लिए एक प्राथमिक उदेश्य का कार्य करता है। यह निर्णय के लिए एक औपचारिक आधार के रूप में कार्य करता है। इसलिए, वकीलों का कानून के न्यायलय में बेहतर जिरह करने के लिए, प्रभावशाली प्रतिपादन तैयार करने में उच्च कुशल होना आवश्यक होता है। हांलांकि, युवा वकील को पदिपादन की कला को सीखने में मुश्किलें आती है। यहाँ तक कि वरिष्ठ वकीलों के तहत प्रशिक्षण भी ज़्यादातर मामलों में कोई मदद नहीं कर पाता क्योंकि सिविल प्रदिपादन की मूल समझ तथा ज्ञान की कमीं होती है।

यह पाठ्यक्रम मुख्य रूप से सिविल प्रदिपादन की शाखाओं को समझाता है तथा प्रभावशाली प्रतिपादन तैयार करने की कला से संबंधित सभी विषयों की समझ प्रदान करता है। प्रतिपादन के मूल सिद्दांतों का स्वरूप प्रदान करने से विधिशास्त्र संबंधी पहलु प्रदान करने तक, यह पाठ्यक्रम एक बहुत ही स्पष्ट तथा संक्षिप्त तरीके से एक प्रतिपादन को दायर करने की प्रक्रिया की व्याख्या करता है। कानून के छात्र, नए स्नातक तथा युवा वकील इस पाठ्यक्रम को सिविल प्रतिपादन की गहरी समझ विकसित करने के लिए एक मज़बूत स्रोत के रूप में पाएगें।

पाठ्यक्रम का परिणाम

 
 

इस पाठ्यक्रम के समाप्त होने पर, आप सक्षम होंगें:

  • भारत में सिविल प्रदिपादन को विकसित तथा दायर करने की प्रक्रिया की समझना।
  • लागू न्यायलय नियमों के अनुसार न्यायलय के दस्तावेजों को तथा बातचीत आवेदनों को तैयार करना जिन्हें न्यायलय में दायर किया जाना है।
  • एक मुवक्किल को एक निर्णय, कथित निर्णय तथा लागत आदेश के अमल के प्रभाव पर सलाह देना।
  • प्रदान किये गए मामलों के कानूनों तथा मामलों के अध्ययन के साथ सिविल अभ्यास में मुद्दों की समझ।

पाठ्यक्रम की रूपरेखा

 
 
  • मोड्यूल 1 – भारत में सिविल प्रतिपादन तथा प्रक्रिया
  • मोड्यूल 2 – लिखित बयान, प्रत्युत्तर, जवाब तथा बातचीत आवेदन
  • मोड्यूल 3 – निष्पादन की कार्यवाही, अपील, संशोधन तथा समीक्षा
  • मोड्यूल 4 – रिट, विशेष आज्ञा याचिकाएँ, तथा जनहितकारी मुकदमें
  • मोड्यूल 5 – सिविल प्रक्रिया सहिंता के संहिता के प्रावधानों के तहत आवेदन
  • प्रमाण पत्र परीक्षा/ मूल्यांकन

किसको यह पाठ्यक्रम लेना चाहिए?

  • वकीलों
  • क़ानूनी परामर्शदाता तथा सलाहकारों
  • कानून छात्रों तथा शोधकर्ताओं
  • भारत में न्यायलय में सिविल प्रदिपादन कायर करने की प्रक्रिया को सीखने में रूचि रखने वाले अन्य हितधारक

स्तर: शुरुआत

भाषा : हिन्दी

आंकलन विधि

पाठ्यक्रम का प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए, पाठ्यक्रम के अंत में शिक्षार्थी का सभी असाइनमेंट्स का जमा करवाना तथा प्रमाण पत्र परीक्षा में कम से कम 50% अंक अर्जित करना अनिवार्य है।

लेखक के बारे में

मनीष श्रीवास्तव, प्रबंधन सहयोगी- तुलिका लॉ एसोसिएट, वर्ष 1999 के बाद से दिल्ली स्थित एक व्यावसायिक वकील है। वह दिल्ली विश्वविध्यालय से एक कानून स्नातक हैं, यह कानून के विभिन्न क्षेत्रों पर आम परामर्श, सलाह तथा मुकदमों की सेवाएं प्रदान करतें हैं।
 

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